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RBI MPC Meeting: EMI पर क्या असर पड़ेगा? CareEdge रिपोर्ट में ‘पॉलिसी पॉज’ के मजबूत संकेत

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आगामी बैठक को लेकर बाजार में उत्सुकता बनी हुई है कि क्या ब्याज दरों में कोई बदलाव होगा और क्या आम लोगों को EMI में राहत मिल सकती है। हालांकि रेटिंग एजेंसी CareEdge Ratings की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस बार RBI द्वारा ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना बेहद कम है और ‘पॉलिसी पॉज’ यानी यथास्थिति बनाए रखने का फैसला हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाएगा। ऐसे में रेपो रेट में न तो कटौती और न ही बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है, जिससे EMI में तत्काल राहत की संभावना भी कम हो गई है।

महंगाई और तेल की कीमतों का दबाव

CareEdge रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई का बड़ा कारण बन रही है।

हाल के महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे परिवहन और सप्लाई चेन की लागत बढ़ गई है। इसका असर सीधे उपभोक्ता महंगाई पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई 8.3% तक पहुंच गई, जो आगे चलकर खुदरा महंगाई (CPI) को भी प्रभावित कर सकती है।

GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती

CareEdge ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपने अनुमान में भी संशोधन किया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.7% कर दिया है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत की आर्थिक विकास दर गिरकर लगभग 6% तक आ सकती है। यह स्थिति आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

रुपये पर दबाव, लेकिन मजबूत विदेशी भंडार राहत

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक लगभग 4.9% कमजोर हुआ है। अगर वैश्विक तनाव जारी रहता है तो रुपये में और गिरावट आकर यह 92 से 96 के स्तर तक पहुंच सकता है।

हालांकि राहत की बात यह है कि भारत के पास करीब 690 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से निपटने में मदद कर सकता है।

बैंकिंग सेक्टर की स्थिति

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (नकदी) में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह अप्रैल में 3.9 लाख करोड़ रुपये थी, जो मई में घटकर 1.9 लाख करोड़ रुपये रह गई। इसके बावजूद बैंकिंग सेक्टर में कर्ज वितरण की रफ्तार मजबूत बनी हुई है और सालाना क्रेडिट ग्रोथ 16.3% दर्ज की गई है।

RBI का रुख क्या रहेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल किसी बड़े बदलाव के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना सकता है। यानी केंद्रीय बैंक आर्थिक संकेतकों और महंगाई के रुझान पर नजर बनाए रखेगा और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगा।

निष्कर्ष

CareEdge की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी MPC बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है। इसका सीधा मतलब है कि आम लोगों को फिलहाल EMI में किसी राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। आगे की दिशा पूरी तरह वैश्विक तेल कीमतों, महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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