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BJP की राज्यसभा सूची से बढ़ी सियासी सरगर्मी: दो केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला टिकट, कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। सूची सामने आने के बाद जहां कई नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है, वहीं दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम गायब होने से राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu और George Kurian को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया है, जिसके बाद मोदी सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दोनों नेता राज्यसभा के माध्यम से संसद पहुंचे थे और वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका नाम सूची से बाहर रहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या बड़े बदलाव की तैयारी में है भाजपा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के जरिए कई संकेत दिए हैं। पार्टी ने इस बार अधिकांश राज्यों में नए चेहरों और संगठन के सक्रिय नेताओं पर भरोसा जताया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि भाजपा सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नई रणनीति के तहत काम कर रही है।

हाल ही में कुछ केंद्रीय नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां दिए जाने के बाद यह चर्चा पहले से ही चल रही थी कि आने वाले समय में सरकार और संगठन के बीच भूमिकाओं का पुनर्गठन हो सकता है। राज्यसभा सूची ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।

नए नेताओं को मिला अवसर

भाजपा ने इस बार संगठन से जुड़े कई नेताओं को राज्यसभा के लिए चुना है। राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh और राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष Satish Poonia को पहली बार उच्च सदन भेजने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा गुजरात से ऐसे नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है जो ओबीसी और आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी संगठन के मजबूत चेहरों को प्राथमिकता दी गई है।

बिट्टू और कुरियन को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

पंजाब की राजनीति में प्रभाव रखने वाले रवनीत सिंह बिट्टू को टिकट नहीं मिलने के बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उन्हें राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बड़ी भूमिका दे सकती है। पार्टी पंजाब में अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए उनके अनुभव का उपयोग करना चाहेगी।

वहीं, केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन को लेकर भी माना जा रहा है कि उन्हें दक्षिण भारत में संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। भाजपा लंबे समय से केरल में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

11 सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय

भाजपा ने जिन राज्यों से उम्मीदवार घोषित किए हैं, वहां विधानसभा में उसके पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। गुजरात की चार, राजस्थान और मध्य प्रदेश की दो-दो, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की एक-एक सीट के अलावा ओडिशा की एक सीट पर भी पार्टी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यसभा उम्मीदवारों की यह सूची भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी संगठन के समर्पित नेताओं को आगे लाने, सामाजिक संतुलन बनाए रखने और विभिन्न राज्यों में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने पर फोकस करती दिखाई दे रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्यसभा टिकट से वंचित रहे केंद्रीय मंत्रियों का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और क्या आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा। यही चर्चा फिलहाल देश की राजनीति में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है।

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